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mahabharat 3.249.25: प्रमाद छोड़कर सदैव ब्राह्मणों की जीविका की व्यवस्था और रक्षा करो। अपने मित्रों और संबंधियों का सदैव सहयोग करते रहो। 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.249.25 
ब्राह्मणेषु सदा वृत्तिं कुर्वीथाश्चाप्रमादत:।
बन्धूनां सुहृदां चैव भवेथास्त्वं गति: सदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
प्रमाद छोड़कर सदैव ब्राह्मणों की जीविका की व्यवस्था और रक्षा करो। अपने मित्रों और संबंधियों का सदैव सहयोग करते रहो। 25॥
 
Leaving carelessness, always arrange and protect the livelihood of Brahmins. Always keep supporting your friends and relatives. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)