Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.249.24: ‘जैसे इन्द्र मरुतगणों की रक्षा करते हैं, वैसे ही तुम भी अपने अन्य भाइयों की रक्षा करो। जैसे देवता अपनी जीविका के लिए इन्द्र पर निर्भर रहते हैं, वैसे ही तुम्हारे सम्बन्धी भी अपनी जीविका के लिए तुम्हारी शरण लें।॥24॥ | mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘जैसे इन्द्र मरुतगणों की रक्षा करते हैं, वैसे ही तुम भी अपने अन्य भाइयों की रक्षा करो। जैसे देवता अपनी जीविका के लिए इन्द्र पर निर्भर रहते हैं, वैसे ही तुम्हारे सम्बन्धी भी अपनी जीविका के लिए तुम्हारी शरण लें।॥24॥
‘Just as Indra protects the Marutganas, you should faithfully take care of your other brothers. Just as the gods depend on Indra for their livelihood, your relatives should also take shelter in you for their livelihood.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥