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mahabharat 3.249.22: वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! इस प्रकार सोच में डूबे दुर्योधन ने दु:शासन से कहा- 'भरतनन्दन दु:शासन! मेरी बात सुनो -। 22॥   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.249.22 
वैशम्पायन उवाच
एवं चिन्तापरिगतो दु:शासनमथाब्रवीत्।
दु:शासन निबोधेदं वचनं मम भारत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! इस प्रकार सोच में डूबे दुर्योधन ने दु:शासन से कहा- 'भरतनन्दन दु:शासन! मेरी बात सुनो -। 22॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Thus, Duryodhana, lost in thoughts, said to Dushasan - 'Bharatanandan Dushasan! Listen to me -॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)