Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.249.21: मेरे शत्रुओं ने मेरा उपहास किया है। मुझे अपने पुरुषत्व का अभिमान था; किन्तु यहाँ मैं कोई वीरता नहीं दिखा सका। वीर पाण्डवों ने मुझे तिरस्कार की दृष्टि से देखा है। (ऐसी स्थिति में मैं इस जीवन से विमुख हो गया हूँ।)॥21॥ | mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे शत्रुओं ने मेरा उपहास किया है। मुझे अपने पुरुषत्व का अभिमान था; किन्तु यहाँ मैं कोई वीरता नहीं दिखा सका। वीर पाण्डवों ने मुझे तिरस्कार की दृष्टि से देखा है। (ऐसी स्थिति में मैं इस जीवन से विमुख हो गया हूँ।)॥21॥
My enemies have made fun of me. I was proud of my manliness; but here I could not show any bravery. The valiant Pandavas have looked at me with disdain. (In such a condition I have become averse to this life.)॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥