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mahabharat 3.249.2: वीर गंधर्व! तुम मेरे इन भाइयों को मुक्त कर दो। पाण्डवों के जीवित रहते ये ऐसा अपमान सहन नहीं कर सकते।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.249.2 
भ्रातॄनर्हसि मे वीर मोक्तुं गन्धर्वसत्तम।
अनर्हधर्षणा हीमे जीवमानेषु पाण्डुषु॥ २॥
 
 
अनुवाद
वीर गंधर्व! तुम मेरे इन भाइयों को मुक्त कर दो। पाण्डवों के जीवित रहते ये ऐसा अपमान सहन नहीं कर सकते।॥2॥
 
Brave Gandharva! You should free these brothers of mine. They cannot tolerate such insults while the Pandavas are alive.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)