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mahabharat 3.249.15-16: भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विदुर, संजय, बाह्लीक, भूरिश्रवा तथा अन्य श्रेष्ठ पुरुष जो वृद्धजनों द्वारा आदरणीय हैं, तथा ब्राह्मण, श्रेष्ठ वैश्य और उदासीन भाव वाले लोग मुझसे क्या कहेंगे और मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा?॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  3.249.15-16 
भीष्मद्रोणौ कृपद्रौणी विदुर: संजयस्तथा।
बाह्लीक: सौमदत्तिश्च ये चान्ये वृद्धसम्मता:॥ १५॥
ब्राह्मणा: श्रेणिमुख्याश्च तथोदासीनवृत्तय:।
किं मां वक्ष्यन्ति किं चापि प्रतिवक्ष्यामि तानहम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विदुर, संजय, बाह्लीक, भूरिश्रवा तथा अन्य श्रेष्ठ पुरुष जो वृद्धजनों द्वारा आदरणीय हैं, तथा ब्राह्मण, श्रेष्ठ वैश्य और उदासीन भाव वाले लोग मुझसे क्या कहेंगे और मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा?॥15-16॥
 
What will Bhishma, Drona, Krupacharya, Ashvatthama, Vidura, Sanjaya, Bahlika, Bhurishrava and other noble persons who are respected by the aged persons, as well as the Brahmins, the leading Vaishyas and the people with an indifferent attitude say to me and what answer will I give them?॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)