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mahabharat 3.249.11-12: मेरे सभी भाई आज ही अपनी राजधानियों को चले जाएँ। कर्ण आदि मेरे मित्र और अन्य सम्बन्धी भी आज ही दु:शासन को आगे करके हस्तिनापुर लौट जाएँ।   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  3.249.11-12 
भ्रातरश्चैव मे सर्वे यान्त्वद्य स्वपुरं प्रति॥ ११॥
कर्णप्रभृतयश्चैव सुहृदो बान्धवाश्च ये।
दु:शासनं पुरस्कृत्य प्रयान्त्वद्य पुरं प्रति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मेरे सभी भाई आज ही अपनी राजधानियों को चले जाएँ। कर्ण आदि मेरे मित्र और अन्य सम्बन्धी भी आज ही दु:शासन को आगे करके हस्तिनापुर लौट जाएँ।
 
All my brothers should go to their capitals today. My friends like Karna and other relatives should also go back to Hastinapur today itself, leading Dushasan ahead.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)