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mahabharat 3.249.1: दुर्योधन ने कहा, 'कर्ण!' चित्रसेन के साथ मिलकर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अर्जुन ने मुस्कुराते हुए ये वीर वचन कहे।   |   mahabharat अध्याय 3.249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 249: दुर्योधनका कर्णसे अपनी ग्लानिका वर्णन करते हुए आमरण अनशनका निश्चय, दु:शासनको राजा बननेका आदेश, दु:शासनका दु:ख और कर्णका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.249.1 
दुर्योधन उवाच
चित्रसेनं समागम्य प्रहसन्नर्जुनस्तदा।
इदं वचनमक्लीबमब्रवीत् परवीरहा॥ १॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, 'कर्ण!' चित्रसेन के साथ मिलकर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अर्जुन ने मुस्कुराते हुए ये वीर वचन कहे।
 
Duryodhana said, 'Karna! Arjuna, who had then killed the enemy warriors after joining Chitrasena, said these heroic words smilingly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)