दोनों एक दूसरे से मिले और अपने कवच उतार दिए। फिर सभी वीर गंधर्व पांडवों के साथ मिल गए। तत्पश्चात चित्रसेन और धनंजय ने एक दूसरे का सत्कार किया॥16॥
Both of them met each other and took off their armour. Then all the brave Gandharvas united with the Pandavas. After that Chitrasen and Dhananjay honoured each other.॥ 16॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि दुर्योधनवाक्ये अष्टचत्वारिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें दुर्योधनवाक्यविषयक दो सौ अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल १६ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)