श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 248: दुर्योधनका कर्णको अपनी पराजयका समाचार बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.248.13 
तत: समन्तात् पश्याम: शरजालेन वेष्टितम्।
अमानुषाणि चास्त्राणि प्रमुञ्चन्तं धनंजयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसी समय हमने देखा कि हमारे चारों ओर बाणों का जाल फैला हुआ है और उससे घिरे हुए अर्जुन दिव्य अस्त्रों की वर्षा कर रहे हैं ॥13॥
 
At that very moment we saw that all around us there was a net of arrows and Arjuna, surrounded by it, was showering divine weapons. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)