वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! जब कर्ण ने ऐसा कहा, तब राजा दुर्योधन ने अश्रुपूर्ण शब्दों में अंगराज कर्ण से इस प्रकार कहा।
Vaishmpayana says: O King! When Karna said this, then King Duryodhana spoke to the King of Angas (Karna) with tearful words as follows. 16.
इति श्रीमहाभारते वर्नपर्वणि घोषयात्रापर्वणि कर्णदुर्योधनसंवादे सप्तचत्वारिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें कर्णदुर्योधनसंवादविषयक
दो सौ सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)