श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 247: सेनासहित दुर्योधनका मार्गमें ठहरना और कर्णके द्वारा उसका अभिनन्दन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.247.12 
अहं त्वभिद्रुत: सर्वैर्गन्धर्वै: पश्यतस्तव।
नाशक्नुवं स्थापयितुं दीर्यमाणां च वाहिनीम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं समस्त गन्धर्वों से पराजित होकर तुम्हारे सामने से भाग गया था। मैं बिखरी हुई और भागती हुई सेना को स्थिर न रख सका॥12॥
 
I was defeated by all the Gandharvas and fled in front of you. I could not keep the scattered and fleeing army steady.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)