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mahabharat 3.247.11: कुरुनन्दन! मैं आपके सभी पराक्रमी भाइयों को देख रहा हूँ, जिन्होंने अपने शत्रुओं को जीत लिया है, युद्ध के लिए तत्पर हैं और पुनः विजय की इच्छा से युक्त हैं। यह भी सौभाग्य का लक्षण है।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.247: सेनासहित दुर्योधनका मार्गमें ठहरना और कर्णके द्वारा उसका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 247: सेनासहित दुर्योधनका मार्गमें ठहरना और कर्णके द्वारा उसका अभिनन्दन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.247.11 
दिष्टॺा समग्रान् पश्यामि भ्रातृृंस्ते कुरुनन्दन।
विजिगीषून् रणे युक्तान्निर्जितारीन् महारथान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! मैं आपके सभी पराक्रमी भाइयों को देख रहा हूँ, जिन्होंने अपने शत्रुओं को जीत लिया है, युद्ध के लिए तत्पर हैं और पुनः विजय की इच्छा से युक्त हैं। यह भी सौभाग्य का लक्षण है।॥11॥
 
Kurunandan! I see all your mighty brothers, who have conquered their enemies, ready for the war and are filled with the desire for victory again. This too is a sign of good fortune. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)