श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  3.246.7-8 
वचनाद् देवराजस्य ततोऽस्मीहागतो द्रुतम्॥ ७॥
अयं दुरात्मा बद्धश्च गमिष्यामि सुरालयम्।
नेष्याम्येनं दुरात्मानं पाकशासनशासनात्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से मैं देवराज की आज्ञा मानकर तुरन्त यहाँ चला आया। यह दुष्टात्मा दुर्योधन मेरी कैद में आ गया है; अतः अब मैं देवलोक जाऊँगा और पक्षाघात इन्द्र की अनुमति से इस दुष्टात्मा को भी वहाँ ले जाऊँगा।॥8॥
 
From there, I obeyed the order of the king of gods and immediately came here. This evil-souled Duryodhan has come under my captivity; hence, now I will go to Devlok and with the permission of Pakshashan Indra, I will take this evil-souled soul there as well. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)