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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.246.23 
स्वस्तिमान् सहित: सर्वैर्भ्रातृभि: कुरुनन्दन।
गृहान् व्रज यथाकामं वैमनस्यं च मा कृथा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'कुरुनंदन! अब तुम अपने सभी भाइयों के साथ अपनी इच्छानुसार शांतिपूर्वक घर जाओ। हमसे कोई द्वेष मत रखो।'
 
‘Kuru Nandan! Now you go home with all your brothers as per your wish in peace. Do not keep any animosity towards us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)