श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.246.16 
आज्ञापयध्वमिष्टानि प्रीयामो दर्शनेन व:।
प्राप्य सर्वानभिप्रायांस्ततो व्रजत मा चिरम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'गन्धर्वो! कृपया हमें अपनी इच्छित सेवा करने की अनुमति दीजिए। हम सब आपको देखकर बहुत प्रसन्न हैं। अपनी सभी इच्छित वस्तुएँ प्राप्त करके आप शीघ्र ही यहाँ से चले जाइए।॥16॥
 
‘Gandharvas! Please give us permission to perform your desired service. We are all very happy to see you. After getting all your desired things, please leave from here quickly.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)