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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा
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श्लोक 15
श्लोक
3.246.15
उपकारो महांस्तात कृतोऽयं मम खेचरै:।
कुलं न परिभूतं मे मोक्षणेऽस्य दुरात्मन:॥ १५॥
अनुवाद
पिताश्री! आकाश में भ्रमण करने वाले गन्धर्वों ने इस दुष्टात्मा को जाने देकर मुझ पर बड़ा उपकार किया, इसलिए मेरे कुल की कोई कलंक नहीं लगी॥15॥
Father! The sky-traveling Gandharvas did me a great favour by letting this evil soul go, hence my clan was not disgraced.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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