श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.246.13 
अजातशत्रुस्तच्छ्रुत्वा गन्धर्वस्य वचस्तदा।
मोक्षयामास तान् सर्वान् गन्धर्वान् प्रशशंस च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
गन्धर्वों का यह कथन सुनकर शत्रुओं के शत्रु युधिष्ठिर ने उस समय समस्त कौरवों को बन्धन से मुक्त कर दिया और गन्धर्वों की बहुत प्रशंसा की-॥13॥
 
Hearing this statement of the Gandharvas, the enemy of the enemies, Yudhishthir, at that time freed all the Kauravas from bondage and praised the Gandharvas profusely -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)