श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.246.1-2 
वैशम्पायन उवाच
ततोऽर्जुनश्चित्रसेनं प्रहसन्निदमब्रवीत्।
मध्ये गन्धर्वसैन्यानां महेष्वासो महाद्युति:॥ १॥
किं ते व्यवसितं वीर कौरवाणां विनिग्रहे।
किमर्थं च सदारोऽयं निगृहीत: सुयोधन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! तत्पश्चात् परम तेजस्वी धनुर्धर अर्जुन ने गन्धर्वों की सेना के बीच चित्रसेन से हँसकर पूछा - 'वीर ! कौरवों को बंदी बनाने का तुम्हारा क्या उद्देश्य था ? तुमने दुर्योधन को उसकी स्त्रियों सहित क्यों बन्दी बनाया ?' 1-2॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! After that, Arjuna, the most brilliant archer, laughingly asked Chitrasena amidst the army of Gandharvas – 'Brave! What was your objective in capturing the Kauravas? Why did you imprison Duryodhana along with his women?' 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)