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mahabharat 3.245.4: महाराज! जब पुरुषोत्तम पाण्डवों ने युद्धस्थल में सैकड़ों गन्धर्वों को अपने ऊपर आक्रमण करते देखा, तब उन्होंने बार-बार बाणों की वर्षा करके उन सबको रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.245: पाण्डवोंके द्वारा गन्धर्वोंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 245: पाण्डवोंके द्वारा गन्धर्वोंकी पराजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.245.4 
तान् समापततो राजन् गन्धर्वाञ्छतशो रणे।
प्रत्यगृह्णन्नरव्याघ्रा: शरवर्षैरनेकश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब पुरुषोत्तम पाण्डवों ने युद्धस्थल में सैकड़ों गन्धर्वों को अपने ऊपर आक्रमण करते देखा, तब उन्होंने बार-बार बाणों की वर्षा करके उन सबको रोक दिया।
 
King! When the Pandavas, the best of men, saw hundreds of Gandharvas attacking them on the battlefield, they stopped them all by repeatedly showering their arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)