| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 245: पाण्डवोंके द्वारा गन्धर्वोंकी पराजय » श्लोक 30 |
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| | | | श्लोक 3.245.30  | चित्रसेनश्च भीमश्च सव्यसाची यमावपि।
पृष्ट्वा कौशलमन्योन्यं रथेष्वेवावतस्थिरे॥ ३०॥ | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात् गन्धर्वराज चित्रसेन, भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव एक-दूसरे का कुशलक्षेम पूछकर अपने-अपने रथों पर बैठ गये। | | | | Thereafter the Gandharva king Chitrasena, Bhimsena, Arjun and Nakula and Sahadeva, after inquiring about each other's well-being, remained seated in their chariots. | | | इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि गन्धर्वपराभवे पञ्चचत्वारिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें गन्धर्वपराजयविषयक
दो सौ पैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४५॥ | | | | ✨ ai-generated | | |
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