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mahabharat 3.245.18: जैसे इन्द्र के बाणों से राक्षस जल जाते हैं, उसी प्रकार कुन्ती के बाणों से गन्धर्व लोग भी जल गए। इससे वे अत्यन्त दुःखी हुए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.245: पाण्डवोंके द्वारा गन्धर्वोंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 245: पाण्डवोंके द्वारा गन्धर्वोंकी पराजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.245.18 
ते दह्यमाना गन्धर्वा: कुन्तीपुत्रस्य सायकै:।
दैतेया इव शक्रेण विषादमगमन् परम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्र के बाणों से राक्षस जल जाते हैं, उसी प्रकार कुन्ती के बाणों से गन्धर्व लोग भी जल गए। इससे वे अत्यन्त दुःखी हुए॥18॥
 
The Gandharvas were burnt by Kunti's arrows in the same way as demons were burnt by Indra's arrows. This made them very sad. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)