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mahabharat 3.245.17: कुरुकुल का सुख बढ़ाने वाले अर्जुन ने स्थूनाकर्ण, इन्द्रजाल, सौर, आग्नेय और सौम्य नामक दिव्यास्त्रों का प्रयोग किया ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.245: पाण्डवोंके द्वारा गन्धर्वोंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 245: पाण्डवोंके द्वारा गन्धर्वोंकी पराजय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.245.17 
स्थूणाकर्णेन्द्रजालं च सौरं चापि तथार्जुन:।
आग्नेयं चापि सौम्यं च ससर्ज कुरुनन्दन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कुरुकुल का सुख बढ़ाने वाले अर्जुन ने स्थूनाकर्ण, इन्द्रजाल, सौर, आग्नेय और सौम्य नामक दिव्यास्त्रों का प्रयोग किया ॥17॥
 
Arjuna, who increased the happiness of Kurukula, used divine weapons named Sthunakarn, Indrajal, Saur, Agneya and Soumya. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)