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mahabharat 3.244.5-7: तभी कौरव सैनिकों की भयंकर गर्जना सुनाई दी। महाबली पाण्डव योद्धाओं को एक साथ आक्रमण करते देख, विजय के तेज से विभूषित, वायु में उड़ते हुए, महाबली गंधर्व क्षण भर में ही वन में इस प्रकार एकत्रित हो गए, मानो उन्हें किसी का भय ही न हो। तत्पश्चात, समस्त गंधर्व अपनी विजय से हर्षित होकर शत्रुओं का सामना करने के लिए लौट आए।   |   mahabharat अध्याय 3.244: पाण्डवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 244: पाण्डवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध  »  श्लोक 5-7
 
 
श्लोक  3.244.5-7 
तत: कौरवसैन्यानां प्रादुरासीन्महास्वन:॥ ५॥
प्रयातान् सहितान् दृष्ट्वा पाण्डुपुत्रान् महारथान्।
जितकाशिनश्च खचरास्त्वरिताश्च महारथा:॥ ६॥
क्षणेनैव वने तस्मिन् समाजग्मुरभीतवत्।
न्यवर्तन्त तत: सर्वे गन्धर्वा जितकाशिन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तभी कौरव सैनिकों की भयंकर गर्जना सुनाई दी। महाबली पाण्डव योद्धाओं को एक साथ आक्रमण करते देख, विजय के तेज से विभूषित, वायु में उड़ते हुए, महाबली गंधर्व क्षण भर में ही वन में इस प्रकार एकत्रित हो गए, मानो उन्हें किसी का भय ही न हो। तत्पश्चात, समस्त गंधर्व अपनी विजय से हर्षित होकर शत्रुओं का सामना करने के लिए लौट आए।
 
Then the terrifying roar of the Kaurava soldiers was heard. Seeing the mighty Pandava warriors attacking together, the mighty Gandharvas flying in the air and adorned with the glory of victory, hastily assembled themselves inside the forest in a moment as if they had no fear of anyone. Thereafter, all the Gandharvas, exulting in their victory, returned to face their enemies. 5-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)