Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.244.3-4h: तत्पश्चात् हाथों में नाना प्रकार के दिव्यास्त्र धारण किए हुए, कवच पहने हुए, रथों पर सवार तथा ध्वजाओं और धनुषों से विभूषित होकर समस्त पाण्डव प्रज्वलित अग्नि के समान शोभायमान होने लगे। | mahabharat अध्याय 3.244: पाण्डवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आयुधानि च दिव्यानि विविधानि समादधु:।
ते दंशिता रथै: सर्वे ध्वजिन: सशरासना:॥ ३॥
पाण्डवा: प्रत्यदृश्यन्त ज्वलिता इव पावका:।
अनुवाद
तत्पश्चात् हाथों में नाना प्रकार के दिव्यास्त्र धारण किए हुए, कवच पहने हुए, रथों पर सवार तथा ध्वजाओं और धनुषों से विभूषित होकर समस्त पाण्डव प्रज्वलित अग्नि के समान शोभायमान होने लगे।
Then, holding various kinds of divine weapons in their hands, wearing armour, riding on chariots and adorned with flags and bows, all the Pandavas began to look like blazing fires. 3 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥