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श्लोक 3.243.d9  |
वैशम्पायन उवाच
एतस्मिन्नन्तरे राजंश्चित्रसेनेन वै हृत:।
विललाप सुदु:खार्तो ह्रियमाण: सुयोधन:॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! उसी समय चित्रसेन द्वारा हरण किये जाने पर दुर्योधन अत्यन्त दुःखी हुआ और जोर-जोर से विलाप करने लगा। |
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| Vaishmpayana says: Janamejaya! At that very moment Duryodhan, being abducted by Chitrasena, was greatly distressed and began to lament loudly. |
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