Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.243.d9: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! उसी समय चित्रसेन द्वारा हरण किये जाने पर दुर्योधन अत्यन्त दुःखी हुआ और जोर-जोर से विलाप करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 3.243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  3.243.d9 
वैशम्पायन उवाच
एतस्मिन्नन्तरे राजंश्चित्रसेनेन वै हृत:।
विललाप सुदु:खार्तो ह्रियमाण: सुयोधन:॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! उसी समय चित्रसेन द्वारा हरण किये जाने पर दुर्योधन अत्यन्त दुःखी हुआ और जोर-जोर से विलाप करने लगा।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! At that very moment Duryodhan, being abducted by Chitrasena, was greatly distressed and began to lament loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)