Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.243.d7-d8: धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन को पकड़कर दण्डित करना तो हमें ही चाहिए था; परन्तु किसी और ने, हमारी मित्रता के कारण, स्वयं ही वह कार्य कर दिया। हे राजन, आप दुःखी न हों; गन्धर्व सचमुच हमारे प्रति दयालु हैं। | mahabharat अध्याय 3.243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन को पकड़कर दण्डित करना तो हमें ही चाहिए था; परन्तु किसी और ने, हमारी मित्रता के कारण, स्वयं ही वह कार्य कर दिया। हे राजन, आप दुःखी न हों; गन्धर्व सचमुच हमारे प्रति दयालु हैं।
It was we who should have caught and punished Duryodhan, son of Dhritarashtra; but someone else, out of friendship with us, himself completed that task. O King, do not be sad; the Gandharva is indeed benevolent to us.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥