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श्लोक  3.243.d4 
कालकूटं विषं तीक्ष्णं भोजने मम भारत।
उप्त्वा गङ्गां लतापाशैर्बद्‍ध्वा च प्राक्षिपत् प्रभो॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी रत्न! उसी ने मेरे भोजन में तीव्र विष मिलाया और मुझे लताओं से बाँधकर गंगा नदी में फेंक दिया।
 
O Lord, the jewel of the Bharata clan! It was he who mixed strong poison in my food and after tying me with creepers threw me in the river Ganga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)