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श्लोक 3.243.5  |
दुर्योधनस्य ग्रहणाद् गन्धर्वेण बलात् प्रभो।
स्त्रीणां बाह्याभिमर्शाच्च हतं भवति न: कुलम्॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| हे बलवान भीम! गन्धर्व द्वारा दुर्योधन को बलपूर्वक पकड़ लेने और पराये पुरुष द्वारा कुरुवंश की स्त्रियों का हरण कर लेने से हमारे कुल का जो अपमान हुआ है, वह कुल के लिए मृत्यु के समान है॥5॥ |
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| Powerful Bhima! The humiliation that has been caused to our clan by the forceful capture of Duryodhan by a Gandharva and the abduction of the women of the Kuru clan by an outsider is akin to death for the clan. ॥ 5॥ |
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