श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.243.22 
अर्जुनस्य तु तां श्रुत्वा प्रतिज्ञां सत्यवादिन:।
कौरवाणां तदा राजन् पुन: प्रत्यागतं मन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! सत्यनिष्ठ अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर कौरवों को राहत मिली।
 
King! On hearing the promise made by the truthful Arjun, the Kauravas felt relieved.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि दुर्योधनमोचनानुज्ञायां त्रिचत्वारिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें दुर्योधनको छुड़ानेकी आज्ञाविषयक

दो सौ तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४३॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३७ १/२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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