श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.243.2 
भवन्ति भेदा ज्ञातीनां कलहाश्च वृकोदर।
प्रसक्तानि च वैराणि कुलधर्मो न नश्यति॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन! भाइयों में मतभेद और झगड़े होते रहते हैं। कभी-कभी उनमें वैर भी उत्पन्न हो जाता है; परंतु इससे कुल का धर्म अर्थात् घनिष्ठता नष्ट नहीं होती॥ 2॥
 
Bhimsena! Differences of opinion and quarrels keep on taking place among the brothers. Sometimes, enmity also develops between them; but this does not destroy the Dharma of the clan i.e. closeness.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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