श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.243.17 
न साम्ना प्रतिपद्येत यदि गन्धर्वराडसौ।
पराक्रमेण मृदुना मोक्षयेथा: सुयोधनम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदि आपके समझाने पर भी गंधर्वराज चित्रसेन आपकी बात न माने तो आपको सौम्य पराक्रम का प्रयोग करके दुर्योधन को छुड़ाना चाहिए॥ 17॥
 
If despite your persuasion, the Gandharva king Chitrasena does not listen to you, then you must use gentle bravery to free Duryodhan.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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