Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.243.15: हे वीर भीमसेन! यदि मेरा यह यज्ञ आरम्भ न हुआ होता, तो मैं स्वयं दुर्योधन को बचाने के लिए दौड़ पड़ता। अब इस विषय में और अधिक सोचना मेरे लिए उचित नहीं है॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 3.243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.243.15 
स्वयमेव प्रधावेयं यदि न स्याद् वृकोदर।
विततो मे क्रतुर्वीर न हि मेऽत्र विचारणा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे वीर भीमसेन! यदि मेरा यह यज्ञ आरम्भ न हुआ होता, तो मैं स्वयं दुर्योधन को बचाने के लिए दौड़ पड़ता। अब इस विषय में और अधिक सोचना मेरे लिए उचित नहीं है॥ 15॥
 
Valiant Bhimasena! Had this yajna of mine not begun, I myself would have rushed to rescue Duryodhan. It is not proper for me to think about this matter any further.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)