श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 243: युधिष्ठिरका भीमसेनको गन्धर्वोंके हाथसे कौरवोंको छुड़ानेका आदेश और इसके लिये अर्जुनकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.243.1 
युधिष्ठिर उवाच
अस्मानभिगतांस्तात भयार्ताञ्छरणैषिण:।
कौरवान् विषमप्राप्तान् कथं ब्रूयास्त्वमीदृशम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले- पितामह! ये लोग भय से व्याकुल होकर हमारी शरण में आये हैं। इस समय कौरव महान संकट में हैं। फिर आप ऐसे कटु वचन कैसे बोल रहे हैं?॥1॥
 
Yudhishthira said— Father! These people are afflicted with fear and have come to us seeking refuge. At this time the Kauravas are in great trouble. Then how are you speaking such bitter words?॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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