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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 242: गन्धर्वोंद्वारा दुर्योधन आदिकी पराजय और उनका अपहरण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.242.22 
एवं ब्रुवाणं कौन्तेयं भीमसेनमपस्वरम्।
न काल: परुषस्यायमिति राजाभ्यभाषत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र भीमसेन को इस प्रकार विकृत स्वर में बात करते देख राजा युधिष्ठिर ने कहा - 'भैया! यह कटु वचन कहने का समय नहीं है।'
 
Seeing Kunti's son Bhimasena talking in such a distorted tone, King Yudhishthira said - 'Brother! This is not the time to say bitter words.'
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि दुर्योधनादिहरणे द्विचत्वारिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें दुर्योधन आदिका अपहरणविषयक

दो सौ बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)