श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 242: गन्धर्वोंद्वारा दुर्योधन आदिकी पराजय और उनका अपहरण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.242.2 
तान् दृष्ट्वा द्रवत: सर्वान् धार्तराष्ट्रान् पराङ्मुखान्।
दुर्योधनो महाराजो नासीत् तत्र पराङ्मुख:॥ २॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र के समस्त पुत्रों को युद्धभूमि से भागते हुए देखकर भी राजा दुर्योधन स्वयं वहीं खड़ा रहा, उसने पीठ नहीं की॥2॥
 
Even after seeing all the sons of Dhritarashtra running away from the battle field, King Duryodhan himself stood there. He did not turn his back.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)