श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 242: गन्धर्वोंद्वारा दुर्योधन आदिकी पराजय और उनका अपहरण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.242.17 
द्वेष्टारमन्ये क्लीबस्य पातयन्तीति न: श्रुतम्।
इदं कृतं न: प्रत्यक्षं गन्धर्वैरतिमानुषम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'हमने सुना है कि जो लोग असहायों से घृणा करते हैं, वे दूसरों द्वारा अपमानित होते हैं। आज गन्धर्वों ने असाधारण पराक्रम दिखाया है और जो हमने सुना था, उसे सिद्ध कर दिया है।॥17॥
 
‘We have heard that those who hate the helpless are humiliated by others. Today the Gandharvas have demonstrated extraordinary prowess and proved what we had heard.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)