vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 241: कौरवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध और कर्णकी पराजय
»
श्लोक 5
श्लोक
3.241.5
तत: प्रमथ्य सर्वांस्तांस्तद् वनं विविशुर्बलात्।
सिंहनादेन महता पूरयन्तो दिशो दश॥ ५॥
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने अपनी घोर गर्जना को दसों दिशाओं में गुंजाते हुए उन समस्त गन्धर्वों को कुचल डाला और बलपूर्वक द्वैतवन में प्रवेश कर गए ॥5॥
Thereafter, making his loud roar resound in all ten directions, he trampled all those Gandharvas and forcefully entered the Dwaitavan. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×