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श्लोक 3.241.31  |
अन्ये छत्रं वरूथं च बन्धुरं च तथापरे।
गन्धर्वा बहुसाहस्रास्तिलशो व्यधमन् रथम्॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| किसी ने छत्र काट डाला, किसी ने वरूठ और अन्य सैनिकों ने रथ की रस्सियाँ काट डालीं। गन्धर्वों की संख्या कई हजार थी। उन्होंने कर्ण के रथ को टुकड़े-टुकड़े कर डाला॥31॥ |
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| Some cut the umbrella, others the varutha* and the other soldiers cut the ropes of the chariot. The number of Gandharvas was several thousand. They cut Karna's chariot into pieces.॥ 31॥ |
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