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mahabharat 3.241.13-14h: अपने हाथों की चपलता के कारण सूतपुत्र कर्ण ने क्षुरप्र, विशिक, भल्ल और वत्सदन्त नामक लौह बाणों की वर्षा करके सैकड़ों गन्धर्वों को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.241: कौरवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध और कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 241: कौरवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध और कर्णकी पराजय  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  3.241.13-14h 
क्षुरप्रैर्विशिखैर्भल्लैर्वत्सदन्तैस्तथाऽऽयसै:॥ १३॥
गन्धर्वाञ्छतशोऽभ्यघ्नँल्लघुत्वात् सूतनन्दन।
 
 
अनुवाद
अपने हाथों की चपलता के कारण सूतपुत्र कर्ण ने क्षुरप्र, विशिक, भल्ल और वत्सदन्त नामक लौह बाणों की वर्षा करके सैकड़ों गन्धर्वों को घायल कर दिया।
 
Due to the agility of his hands, Suta's son Karna injured hundreds of Gandharvas by showering iron arrows named Kshurapra, Vishik, Bhall and Vatsadant. 13 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)