श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 240: दुर्योधनका सेनासहित वनमें जाकर गौओंकी देखभाल करना और उसके सैनिकों एवं गन्धर्वोंमें परस्पर कटु संवाद  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.240.19 
ते तथेत्येव कौरव्यमुक्त्वा वचनकारिण:।
चिकीर्षन्तस्तदाऽऽक्रीडाञ्जग्मुर्द्वैतवनं सर:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आज्ञाकारी सेवक दुर्योधन से ‘तथास्तु’ कहकर क्रीड़ाभवन बनाने की इच्छा से द्वैतवन नामक सरोवर के पास गया ॥19॥
 
Saying 'Tathaastu' to Duryodhana, the obedient servant went near the lake of Dwaitavan with the desire to build a sports hall. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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