Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.240.14: वहाँ मधुमक्खियाँ कमल पुष्पों का रसपान कर रही थीं। मोरों की मधुर ध्वनि सम्पूर्ण क्षेत्र में व्याप्त थी। वह सरोवर सप्तच्छद (चितवन) वृक्षों से आच्छादित प्रतीत हो रहा था। उसके तटों पर मौलसिरी और नागकेसर के वृक्ष शोभायमान थे॥14॥ | mahabharat अध्याय 3.240: दुर्योधनका सेनासहित वनमें जाकर गौओंकी देखभाल करना और उसके सैनिकों एवं गन्धर्वोंमें परस्पर कटु संवाद । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ मधुमक्खियाँ कमल पुष्पों का रसपान कर रही थीं। मोरों की मधुर ध्वनि सम्पूर्ण क्षेत्र में व्याप्त थी। वह सरोवर सप्तच्छद (चितवन) वृक्षों से आच्छादित प्रतीत हो रहा था। उसके तटों पर मौलसिरी और नागकेसर के वृक्ष शोभायमान थे॥14॥
There, honeybees were enjoying the nectar of lotus flowers. The sweet voice of peacocks was permeating the entire region. The lake seemed to be covered with saptachhad (chitavan) trees. Maulsiri and Nagkesar trees were adorning its banks.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥