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mahabharat 3.240.1: वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! तत्पश्चात् राजा दुर्योधन वन में इधर-उधर डेरा डाले हुए उन गोशालाओं में पहुँचे और वहाँ अपना डेरा डाला॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.240: दुर्योधनका सेनासहित वनमें जाकर गौओंकी देखभाल करना और उसके सैनिकों एवं गन्धर्वोंमें परस्पर कटु संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 240: दुर्योधनका सेनासहित वनमें जाकर गौओंकी देखभाल करना और उसके सैनिकों एवं गन्धर्वोंमें परस्पर कटु संवाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.240.1 
वैशम्पायन उवाच
अथ दुर्योधनो राजा तत्र तत्र वने वसन्।
जगाम घोषानभितस्तत्र चक्रे निवेशनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! तत्पश्चात् राजा दुर्योधन वन में इधर-उधर डेरा डाले हुए उन गोशालाओं में पहुँचे और वहाँ अपना डेरा डाला॥1॥
 
Vaishmpayana says: O Janamejaya! Thereafter King Duryodhana, camping here and there in the forest, reached those cowsheds and pitched his camp there.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)