श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 24: पाण्डवोंका द्वैतवनमें जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.24.26 
लतावतानावनत: स पाण्डवै-
र्महाद्रुम: पञ्चभिरेव धन्विभि:।
बभौ निवासोपगतैर्महात्मभि-
र्महागिरिर्वारणयूथपैरिव॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जैसे महान पर्वत पराक्रमी हाथियों से सुशोभित होता है, उसी प्रकार वह महान वृक्ष, लताओं के समूह से झुका हुआ, वहाँ निवास करने आए पाँच महाधनुर्धर पाण्डवों से सुशोभित होने लगा॥ 26॥
 
Just as a great mountain is adorned by the mighty elephants, similarly that great tree, bowed down by a mass of creepers, started to be adorned by the five great archers, Pandavas, who came to reside there.॥ 26॥
 
इ ति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि द्वैतवनप्रवेशे चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें द्वैतवनप्रवेशविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)