श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 24: पाण्डवोंका द्वैतवनमें जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.24.10 
इदं द्वैतवनं नाम सर: पुण्यजलोचितम्।
बहुपुष्पफलं रम्यं नानाद्विजनिषेवितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पवित्र जल से परिपूर्ण इस सरोवर को द्वैतवन कहते हैं। यहाँ फल-फूलों की प्रचुरता है। यह स्थान देखने में सुन्दर है और यहाँ अनेक ब्राह्मण सेवा करते हैं।॥10॥
 
This lake filled with holy water is called Dwaitavan. There is abundance of fruits and flowers here. This place is beautiful to look at and is served by many Brahmins.॥10॥
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