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mahabharat 3.239.8: राधानंदन! पांडव छल से पराजित हुए हैं। उन्होंने महान वन में रहते हुए अनेक कष्ट सहे हैं। वे निरन्तर तपस्या करते रहे हैं और अब अत्यंत शक्तिशाली हो गए हैं। वे वास्तव में महान योद्धा हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.239.8 
छद्मना निर्जितास्ते तु कर्शिताश्च महावने।
तपोनित्याश्च राधेय समर्थाश्च महारथा:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राधानंदन! पांडव छल से पराजित हुए हैं। उन्होंने महान वन में रहते हुए अनेक कष्ट सहे हैं। वे निरन्तर तपस्या करते रहे हैं और अब अत्यंत शक्तिशाली हो गए हैं। वे वास्तव में महान योद्धा हैं।
 
Radhanandan! The Pandavas have been defeated by deceit. They have had to suffer a lot while living in the great forest. They have been continuously performing penance and have now become very powerful. They are indeed great warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)