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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.239.5 
मृगया चोचिता राजन्नस्मिन् काले सुतस्य ते।
दुर्योधनस्य गमनं समनुज्ञातुमर्हसि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यह आपके पुत्र दुर्योधन के लिए भी वन्य पशुओं का शिकार करने का उपयुक्त समय है। अतः कृपया उसे द्वैत वन जाने की अनुमति प्रदान करें।
 
‘O King! This is also a suitable time for your son Duryodhana to hunt wild animals. Therefore, please give him permission to go to Dwait forest.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)