श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.239.4 
रमणीयेषु देशेषु घोषा: सम्प्रति कौरव।
स्मारणे समय: प्राप्तो वत्सानामपि चाङ्कनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'कुरुराज! इस समय हमारी गौएँ सुन्दर स्थानों पर रहती हैं। यह समय गायों और बछड़ों की गिनती करने तथा उनकी आयु, रंग, जाति और नाम आदि लिखने के लिए भी बहुत उपयोगी है।॥4॥
 
‘Kururaj! At this time our cows are staying in beautiful places. This time is also very useful for counting the cows and calves and writing down the details of their age, colour, caste and name.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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