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mahabharat 3.239.25: नगर के सभी नागरिक अपनी-अपनी पत्नियों सहित महाबाहु दुर्योधन के पीछे-पीछे चल पड़े, जो द्वैतवन नामक सरोवर और वन को देखने के लिए यात्रा पर थे ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.239.25 
तं निर्यान्तं महाबाहुं द्रष्टुं द्वैतवनं सर:।
पौराश्चानुययु: सर्वे सहदारा वनं च तत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
नगर के सभी नागरिक अपनी-अपनी पत्नियों सहित महाबाहु दुर्योधन के पीछे-पीछे चल पड़े, जो द्वैतवन नामक सरोवर और वन को देखने के लिए यात्रा पर थे ॥25॥
 
All the citizens of the city, along with their wives, followed the mighty-armed Duryodhana, who was on a journey to see the lake and forest called Dwaitavan. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)