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mahabharat 3.239.24: दुःशासन, बुद्धिमान शकुनि, अन्य भाइयों और हजारों स्त्रियों से घिरा हुआ दुर्योधन वहाँ से चला गया।   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.239.24 
दु:शासनेन च तथा सौबलेन च धीमता।
संवृतो भ्रातृभिश्चान्यै: स्त्रीभिश्चापि सहस्रश:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
दुःशासन, बुद्धिमान शकुनि, अन्य भाइयों और हजारों स्त्रियों से घिरा हुआ दुर्योधन वहाँ से चला गया।
 
Surrounded by Dushasan, the wise Shakuni, other brothers and thousands of women, Duryodhana departed from there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)